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सोराइसिस का आयुर्वेदिक उपचार

Psoriasis — खुजली, पपड़ी, लालिमा और जलन से राहत के लिए पंचकर्म व औषधि आधारित संपूर्ण उपचार।

सोराइसिस आयुर्वेदिक उपचार 🩹 Psoriasis
पंचकर्मरक्तशोधन आहार चिकित्सातनाव प्रबंधन

सोराइसिस क्या है?

सोराइसिस एक दीर्घकालिक ऑटो-इम्यून त्वचा रोग है जिसमें त्वचा की कोशिकाएँ सामान्य से बहुत तेज़ी से बनती हैं, जिससे त्वचा पर मोटी, लाल, खुजलीदार और चांदी जैसी पपड़ीदार परतें बन जाती हैं। आयुर्वेद में इसे "एककुष्ठ / किट्टिभ" के अंतर्गत रखा गया है, जो मुख्यतः वात व कफ दोष के असंतुलन से होता है।

मुख्य कारण

  • वात व कफ दोष का असंतुलन
  • विरुद्ध आहार व कमजोर पाचन से अमा का निर्माण
  • अत्यधिक मानसिक तनाव व चिंता
  • अनुवांशिक प्रवृत्ति व इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी
  • ठंडा-नम वातावरण व त्वचा का सूखापन

लक्षण

  • त्वचा पर मोटी, लाल व पपड़ीदार परतें
  • लगातार खुजली, जलन व सूखापन
  • कोहनी, घुटनों, सिर की त्वचा व पीठ पर धब्बे
  • नाखूनों में गड्ढे व मोटापन
  • कई बार जोड़ों में दर्द (सोरियाटिक अर्थराइटिस)

हमारा उपचार

सोराइसिस का स्थायी प्रबंधन शरीर की शुद्धि, पाचन सुधार और तनाव नियंत्रण से होता है। हमारा लक्ष्य है भड़कने (flare-ups) को कम करना और त्वचा को स्वस्थ रखना।

  • पंचकर्म: वमन व विरेचन द्वारा गहरी शारीरिक शुद्धि
  • रक्तशोधक औषधि: रक्त को साफ कर सूजन कम करना
  • बाह्य उपचार: औषधीय तेल व लेप से त्वचा को पोषण
  • आहार चिकित्सा: विरुद्ध आहार से बचाव व पथ्य
  • योग व प्राणायाम: तनाव कम करने का मार्गदर्शन

सामान्य प्रश्न

सोराइसिस एक दीर्घकालिक रोग है, परंतु आयुर्वेदिक उपचार से इसे अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है — खुजली, पपड़ी व भड़कना काफी कम हो जाते हैं और त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ रहती है।

नहीं, सोराइसिस संक्रामक नहीं है। यह छूने से किसी और को नहीं होता।

हाँ, उपचार के साथ सही आहार बहुत महत्वपूर्ण है। विरुद्ध आहार से बचाव परिणामों को तेज़ करता है।

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